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लोग मायूस हैं, उन्हें हमदर्दी की ज़रूरत हैः सआदतुल्लाह हुसैनी

Posted on 04 March 2020 by Admin_markaz

 

नई दिल्ली, 04 मार्च 2020। जमाअत इस्लामी हिन्द के अमीर (अध्यक्ष) सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी के नेतृत्व में जमाअत इस्लामी हिन्द के उच्च अधिकारियों पर आधारित एक टीम ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगा प्रभावितों के पुनर्वास और राहत के कामों का जायज़ा लिया । प्रेस को जारी एक बयान में सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी कहा कि दंगा प्रभावित इलाक़ों में ज़रूरतमंदों को आवश्यक मदद पहुंचाने का प्रयास पहले दिन से ही जारी है। इस टीम ने मुस्तफाबाद के अस्पतालों जाकर स्थिति की समीक्षा की वहां सैकड़ों मरीज़ों का इलाज चल रहा है। इस दंगे में अधिक प्रभावित होने वाले इलाकों में से एक इलाक़ा शिव विहार है वहां टीम प्रभावित लोगों से मिली और वास्तविकता जानने का प्रयास किया कि किस तरह वे अस्थायी तौर पर शरण लिए हुए हैं ताकि वे अपने पैतृक घरों को लौट सकें। कहीं कहीं सात से आठ परिवारों को जबरन एक घर में रहने पर मजबूर किया गया है। उन्हें तुरंत पुनर्वास की ज़रूरत है। उन्होंने बताया कि हमारी टीम ने रीलिफ कैंप का दौरा किया जिसे जाफ़राबाद में लगाया गया है। इस कैंप ने दो हज़ार लोगों के रहने की व्यवस्था है। जमाअत इन कैंपों में खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने में सरकारी और अपने जैसे विचार रखने वाले संगठनों को पूरी तरह सहयोग दे रही है। टीम ने मुस्तफाबाद के स्थानीय लोगों की तरफ से शान्ति मार्च में भी हिस्सा लिया। टीम ने दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष डॉक्टर ज़फरुल इस्लाम खान से भी मुलाक़ात की और स्थिति पर चर्चा की।

 

 

स्थिति पर चर्चा के दौरान सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा कि इलाक़े पर हमला इस बात का संकेत दे रहा है कि यह एक योजनाबद्ध तरीक़े से किया गया है। इसीलिए इन हमलों में ख़ासतौर से मुस्लिम वर्गों को, उनके कारोबारों को और इबादतगाहों को निशान बनाया गया है। इस फसाद में गोकूलपुरी टायर मार्केट को आग के हवाले कर दिया गया जिसके नतीजे में 200 दुकानें जल कर राख हो गयीं। यहां मौजूद गैस सिलिंडर बहुत बड़े नुक़सान का कारण बना। गाड़ियों और अपार्टमेंट को चुन चुन कर आग लगाया गया। पुलिस का रवैया भी अत्यंत अनुचित रहा। पुलिस कई जगहों पर मूक दर्शक बनी रही। पुलिस का रवैया उपद्रवियों को सहयोग देने वाला रहा। यही वजह है कि प्रभावित और ज़िंदा बच गये लोग अत्यंत मायूस और परेशान हैं। उन्हें इस घड़ी में परामर्श और हमदर्दी की ज़रूरत है। एक सकारात्मक पहलु यह है कि बहुत से अवसरों पर हिन्दू वर्ग के लोगों ने मुसलमानों की जानें बचायीं, इसी तरह कई स्थानों पर मुसलमानों ने हिन्दुओं की जानों को सुरक्षा प्रदान किया। जिससे यह संकेत मिलता है कि यह फसाद स्थानीय लोगों की तरफ से नहीं, बल्कि बाहरी लोगों की तरफ से योजनाबद्ध तरीके से किया गया था।

सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने बताया कि हमने एक कंट्रोल सेंटर स्थापित किया है ताकि हमारी राहती गतिविधियों का सामंजस्य सही तौर पर हो सके। यह सेंटर जमाअत इस्लामी हिन्द के राष्ट्रीय सचिव मोहम्मद अहमद की देखरेख में है। उन्होंने अपने कामों की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि सबसे पहले सर्वे करके क्षति का अंदाज़ा लगाना है। प्रभावितों की मदद करना और उनके दस्तावेज़ों को ठीक कराने में उनकी मदद करना ताकि वे सरकार की तरफ से मिलने वाली राशि हासिल करने का दावा कर सकें। जख़्मियों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना भी जमाअत की प्राथमिकता है। अब तक बहुत से ऐसे ज़ख़्मी हैं जिनकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया है। बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपना पूरा कारोबार और आमदनी का स्त्रोत खो दिया है। बहुत से ऐसे हैं जिन्होंने अपने एकमात्र कमाने वाले को खोया है। इन सभी को पुनर्वास की ज़रूरत है। प्राथमिकी दर्ज कराने की ज़रूरत है। इसी तरह क़ानूनी मदद की भी ज़रूरत है। हमारे पास परिश्रमी स्वंसेवक हैं जिनमें महिलायें भी शामिल हैं जो हमारी कोशिशों को व्यवहारिक रूप दे सकते हैं। इस टीम में जमाअत इस्लामी हिन्द के अमीर (अध्यक्ष) सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी के अतिरिक्त जमाअत के उपाध्यक्ष मोहम्मद जाफ़र और मोहम्मद सलीम इंजीनियर, जमाअत के राष्ट्रीय सचिव मोहम्मद अहमद और मोहम्मद शफी मदनी एवं जमाअत के उप-सचिव नदीम खान भी शामिल थे।

द्वारा जारी

मीडिया प्रभाग,

जमाअत इस्लामी हिन्द

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